शुभ मुहूर्त

ऋतु के चुदाई के नखरे-1

时间:2010-12-5 17:23:32  作者:वैभव अरोड़ा   来源:आईपीएल का प्वाइंट टेबल  查看:  评论:0
内容摘要:सभी दोस्तों को मेरा प्यार भरा नमस्कार ! मैं अपनी पहली कहानी लेकर आया हूँ।मेरा नाम शुभ है, यह मेरा छो

सभी दोस्तों को मेरा प्यार भरा नमस्कार ! मैं अपनी पहली कहानी लेकर आया हूँ।मेरा नाम शुभ है,ऋतुकेचुदाईकेनखरे यह मेरा छोटा नाम है… मैं रोहतक, हरियाणा से मैं जाट हूँ और आपको तो पता ही होगा दोस्तों हरियाणा के जाट वैसे ही बहुत मशहूर हैं। लेकिन मैं उनसे बिल्कुल अलग हूँ, एकदम मॉडर्न ख्यालों का पढ़ा-लिखा एम बी ए 5’9″ का मस्त रहने वाला स्मार्ट और सुंदर 24 साल का लड़का हूँ।बात आज से 3 साल पहले की है जब मैं कॉलेज से बी. सी. ए. कर रहा था। मेरे एक टीचर ने मुझे सलाह दी कि तू साथ में जम्मू से ज़े.बी.टी. भी कर ले, आगे नौकरी के बहुत अच्छे अवसर मिल जाएँगे, मैंने बात मान कर दाखिला ले भी लिया। उसके बाद एग्जाम देने भी गए। सभी के लिए बस का इंतजाम कर रखा था। सभी मजे लेते हुए जम्मू पहुँच गए। कई लड़कियाँ थी जो बार बार नजरें चुरा कर कई बार मुझे देख जाती लेकिन कुछ भी नहीं हो पाया और पेपर भी ख़ास अच्छे नहीं हुए, हम घर वापिस आ गये।मन दुखी था, फिर सोचा कोई बात नहीं जो हुआ। मैं अपनी दूसरी पढ़ाई में लग गया, वही कॉलेज आना जाना।अब प्रैक्टिकल की तारीख आ गई तो अब फिर से जम्मू जाना पड़ेगा। मैंने अपने दोस्तों से पूछा कि कौन-कौन किस-किस के साथ जाएगा तो उसने बताया कि अबकी बार सब अकेले ही जा रहे हैं।तो मैंने कहा- चल, हम दोनों ट्रेन से चलते हैं।तो वो बोला- ठीक है।लेकिन उसका दो दिन बाद कॉल आया- यार सर की जानने वाली दो लड़कियाँ है, सर कह रहे हैं कि वो अकेली कैसे जाएँगी, तुम दोनों पर भरोसा भी है तो तुम उनको भी ले जाओ।हमने भी सोचा कि चलो, ठीक है, अब गुरु की बात को मना भी नहीं कर सकते थे।हमने सोनीपत से सुबह ट्रेन लेनी थी तो ट्रेन के टाइम से पहले ही हम स्टेशन पर पहुँच गये और वहाँ अपने सर की इन्तज़ार करने लगे। थोड़ी देर बाद सर भी आ गये और उनकी वो स्टूडेंट्स भी उनके साथ ही थी। दोनों ही एकदम मस्त माल थी, वो भी 18-19 साल की। एकका नाम अनु और दूसरी का नाम ऋतु। अनु बहुत खूबसूरत थी लेकिन ऋतु भी सुंदर थी।मैं तो देख कर होश ही खो बैठा था और सोच रहा था ‘वाह री किस्मत, तेरे भी खेल निराले, दो दो बम्ब एक साथ !’लेकिन मेरा दोस्त रवि उन दोनों को बहुत अच्छे से जानता था तो मैंने भी अपने दोस्त से उनके बारे में कुछ नहीं पूछा।ट्रेन आ गई थी सर ने मुझे बोला कि तू इन सबका ध्यान रखना ! मैंने हाँ में सर हिला दिया और ट्रेन चल पड़ी।हम चारों ट्रेन में बैठे। थोड़ी देर की खामोशी के बाद आपस में घुलमिल कर बातें करने लगे, वो दोनों भी ऐसे बातें कर रही थी जैसे मुझे बहुत पहले से जानती हों।बातों बातों में ही और देखने के तरीके से मुझे पता चल गया था कि अनु बिल्कुल सिम्पल और शरीफ लड़की है और ऋतु थोड़ी बोल्ड किस्म की।लेकिन मैंने दोनों में से किसी के बारे में कुछ गलत नहीं सोचा क्योंकि वो दोनों मेरी जिम्मेदारी थी।शाम तक हम जम्मू पहुँच गये। काफी थके हुए थे और अब कमरा भी ढूंढना था रुकने के लिए। बहुत घूमने के बाद एक कमरा मिला और हमने बड़ी राहत की सांस ली। थोड़ी देर बैठे, फिर कपड़े बदल कर चाय वगैरह पी, तब जाकर चैन आया।हम चारों ने रात का खाना होटल में खाया और वापिस अपने कमरे पर आ गये।अब जब सोने का टाइम आया तो पता चला कि चारों के लिए बस एक डबल बेड है और एक चारपाई है। अब इतनी गर्मी में कैसे सोया जाए?काफी सोचने के बाद जो तय हुआ उसका मुझे अंदाजा भी नहीं था।अनु- ऐसा करो, मैं तो इस चारपाई पे सो जाती हूँ और तुम तीनों बेड पर सो जाओ।मैं- तीनों बेड पर कैसे सो सकते हैं, एक तो इतनी गर्मी और हम लड़के और ये लड़की हमारे साथ कैसे सो सकती है?अनु- अब इतनी रात को कर भी क्या सकते हैं, इसके इलावा कोई रास्ता भी तो नहीं है।फिर डबल बेड पर मैं, रवि और ऋतु थे।एक साइड रवि एक साइड ऋतु और बीच में मैं।लेकिन मेरे मन में कुछ भी गलत नहीं था।तो ऋतु ने मेरे और अपने बीच में एक तकिया रख लिया। मैंने भी कहा कि यह काम ठीक किया। रात को सोते हुए एक दूसरे को हाथ पाँव भी नहीं लगेगा।अब जो रात को होने वाला था उसके बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था की ऐसा होगा !!रात को मुझे महसूस हुआ की ऋतु का हाथ बार बार मुझे छू रहा है, मेरी भी आँखे खुल गई।2-3 बार तो मैंने अनदेखा किया, सोचा नींद में हाथ लग गया होगा लेकिन फिर मैंने ऋतु से पूछा- नींद नहीं आ रही है क्या?ऋतु- नींद ही नहीं आ रही।तो हम ऐसे ही बात करने लग गए। हमारी आवाज सुन कर अनु जग गई और बोली- रात के 2 बजे हुए हैं और तुम दोनों बात कर रहे हो? सो जाओ सुबह प्रैक्टिकल देने भी जाना है।हमने कहा- ठीक है, तू भी सो जा और हम भी सो रहे हैं।लेकिन जब लड़की ने पहल ही कर दी तो अब मुझे कहाँ नींद आने वाली थी।हम पहले साधारण बातें कर रहे थे लेकिन धीरे धीरे खुल क़र बात करने लगे। अब मुझे समझ में आने लगा था कि इसे नींद नहीं आ रही थी और इसने जानबूझ कर मुझे भी जगाया है।अब मैं भी गर्म होने लगा और उसको यहाँ वहाँ हाथ लगाने लगा।इस पर ऋतु बोली- ऐसे मत करो प्लीज।मैंने कहा- अच्छा जब तुम कर रही थी तब?बोली- वो तो गलती से हाथ लग गया था।लेकिन यह मुझे भी पता चल गया था और उसे भी कि आग दोनों तरफ लग चुकी है।मैंने उसके कान के पास अपने होंठ ले जा क़र पूछा- कभी किसी के साथ कुछ किया है या नहीं?बोली- नहीं, मैंने आज तक किसी के साथ कुछ नहीं किया सिर्फ बी. ऍफ़. ही देखी है।मैंने कहा- आज तो पूरा लाइव होगा।लेकिन वो कुछ ज्यादा ही नखरे दिखा रही थी और मना कर रही थी, किस भी नहीं करने दे रही थी।मैंने कहा- अब ये नौटंकी किसलिए कर रही हो?तो वो बोली- मैं यह सब नहीं कर सकती। मैं अपने पति के साथ ही पहली बार सेक्स करुँगी!!!अब यह बात सुन कर मेरा तो दिमाग ख़राब हो गया और इतना गुस्सा आया कि साली को यहाँ से भगा दूँ अभी। एक तो खुद आगे बढ़ी और अब मना कर रही है।मैंने कहा- कुछ नहीं होता, यही उम्र है मौज मस्ती करने की !और उसके होंठों पर अपने होंठ चिपका दिए और जोर से चुम्बन किया। कसम से, उसका बदन भी बुरी तरह गर्म था।मैंने उसे बाहों में लेना चाहा लेकिन वो तो अब सति सावित्री बन कर दिखा रही थी। मैंने जबर्दस्ती उसे अपनी बाहों में भर लिया।मेरा लौड़ा भी पूरा खड़ा हो गया था और सलामी दे रहा था।मैं अब उसके ऊपर आ गया था, उसकी चूचियो को दबा रहा था और गर्दन पर चूम रहा था लेकिन को कुतिया तो अब भी नखरे झाड़ रही थी- मुझे नहीं करना ये सब।और आवाज सुन कर रवि की भी थोड़ी नींद खुली और नींद में ही बोल रहा था- सो जाओ दोनों ! क्या गिटर पिटर कर रहे हो?अब उसकी आवाज सुन कर मैं भी शांत हो गया। थोड़ी देर शांत रहने के बाद उससे बोला- तू मेरे ऊपर आ जा।लेकिन ऋतु मना करने लगी मैंने जबर्दस्ती उसे अपने ऊपर लेटा लिया और बाहों में भर लिया। मेरा 7″ का लौड़ा तो खड़ा ही था। मैंने उसकी टाँगें खोल दी, मेरा लोड़ा तो सीधा उसकी चूत को रगड़ने लगा।दोस्तो, वो भी क्या पल था !लेकिन उसका बदन इतनी गर्म था कि बस पूछो मत ! लेकिन यह बात मुझे आज तक समझ नहीं आई कि ऋतु इतनी गर्म होने के बाद भी नखरे क्यों कर रही थी?मैंने दोनों चूतड़ों को कस के मसल डाला लेकिन वो तो अब भी नखरे दिखा रही थी। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।हमारी जोर आजमाइश में बेड हिल गया और रवि फिर से नींद में बड़बड़ाने लगा- तुम दोनों सारी रात बातें ही करते रहोगे या सोना भी है?फिर मेरे दिमाग ने काम किया- यार यहाँ तो रवि भी मेरे पास सो रहा है और अनु भी रात को जगी थी, कहीं हम दोनों पर शक हो गया तो बेइज्जती वाली बात बन जाएगी।ऊपर से ऋतु के नखरे !!अब मैंने ऋतु को किस किया लेकिन उसने साथ नहीं दिया मुझे तो गुस्सा आया ही था। उसे दूसरी ओर पटक दिया और बोला- अब गलती से भी मुझे मत हाथ लगाना और मुझसे बात भी मत करना।इतनी बात कह कर मैं सो गया क्योंकि सुबह के 3-30 बजे हुए थे।अब अगले दिन और रात को क्या हुआ, जानने के लिए आपको थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।दोस्तों यह मेरी पहली कहानी है अगर कुछ गलती हो तो सुझाव जरूर देना।मुझे जरूर मेल करें !
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